Wednesday, August 3, 2011

चलते चलते....

अजीब रस्ता! ये ज़िन्दगी है||०||

चलें तो चलता है,
रुके तो रुकता है|
हमारे पैरों से बंदगी है||१||

इधर मैं हँसता हूँ|
उधर वो हँसती है|
यहाँ ग़मों पे भी एक ख़ुशी है||२||

भला नहीं था कल|
आज गया सब बदल|
बुरा जो हो तो भी बेहतरी है||३||

रुके न कोई भी,
थके न कोई भी|
ये जोश है या कि पस्तगी है||४||

मेरे भरोसे कुछ-
मेरा भरोसा कुछ|
मेरा सहारा 'कोई नहीं' है||५||




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