तुम एक ज़हर हो, धीरे धीरे मेरी जान ले रहे हो,
और मैं सोचता हूँ कि मैं नशे में क्यों हूँ? |
तुम एक तीर हो, मेरे दिल में अन्दर कहीं लगे हो,
और मैं सोचता हूँ कि धड़कन ख़राब है|
तुम एक रात हो, जो बीतती नहीं है काटने पर भी,
और मैं सोचता हूँ कि नींद गायब है |
तुम एक चोट हो, जिगर के किसी कोने में हरे हो अभी,
और मैं सोचता हूँ, मैं लहुलुहान क्यों हूँ? ||
तुम एक दस्त हो, वीरान से, लम्बे से हो,
और मैं सोचता हूँ, सफ़र ख़त्म क्यों नहीं होता?
तुम एक आग हो, शोले भी हैं, लपटें भी हैं,
और मैं सोचता हूँ, इसका बुझना क्यों नहीं होता?
तुम 'कोई नहीं' हो मेरे अपनों में शामिल यूँ तो-
और मैं सोचता हूँ, हर पल मैं तुम्हारा क्यों हूँ? |||
और मैं सोचता हूँ कि मैं नशे में क्यों हूँ? |
तुम एक तीर हो, मेरे दिल में अन्दर कहीं लगे हो,
और मैं सोचता हूँ कि धड़कन ख़राब है|
तुम एक रात हो, जो बीतती नहीं है काटने पर भी,
और मैं सोचता हूँ कि नींद गायब है |
तुम एक चोट हो, जिगर के किसी कोने में हरे हो अभी,
और मैं सोचता हूँ, मैं लहुलुहान क्यों हूँ? ||
तुम एक दस्त हो, वीरान से, लम्बे से हो,
और मैं सोचता हूँ, सफ़र ख़त्म क्यों नहीं होता?
तुम एक आग हो, शोले भी हैं, लपटें भी हैं,
और मैं सोचता हूँ, इसका बुझना क्यों नहीं होता?
तुम 'कोई नहीं' हो मेरे अपनों में शामिल यूँ तो-
और मैं सोचता हूँ, हर पल मैं तुम्हारा क्यों हूँ? |||

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