Monday, September 5, 2011

लाइलाज


मेरा किस्सा यहाँ सुनता कोई नहीं यारों;
कबसे मैं बेवजह ही गाता हूँ|
बेरहम हैं ज़रा हुसन के मालिकाँ यारों;
बात सच्ची है, मैं बताता हूँ|
....................................कि...................................

निगाहों के घायल पड़े हैं यहाँ
दवा काम आएगी कोई नहीं|
हैं मुस्कान के तीर हमको लगे-
हमें नींद आएगी कोई नहीं||१||

अदाओं का जादू चला जिसपे हो
उसे लुकमनां भी बचाते नहीं|
न मन्तर चलेगा, न तन्तर चले,
जड़ी काम आएगी कोई नहीं||२||

मोहब्बत करी कि ज़हर खा लिया,
है एक बात! अंतर तो कुछ भी नहीं|
भले ही पहाड़ों पे ले जाइए-
हवा काम आएगी कोई नहीं||३||

खुदा से जो रूठे फिरे दश्त में
उन्हें ढूँढने का तरीका नहीं|
न बरक़त है उनको, न कोई गुनह-
दुआ काम आएगी कोई नहीं||४||

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