Tuesday, September 6, 2011

कैसे कैसे ............

[कभी सोचा भी न था कि किसी से ऐसे जुड़ जाएंगे कि लाख कोशिशों के बाद भी कच्चा धागा टूट नहीं पाएगा|
यूँ तो हम फौलाद की दीवारें ढाह सकते हैं, मगर क्या खबर थी, ये कागज़ का टुकड़ा राह में आ जाएगा| ]


एक दुनिया है मेरी, एक दुनिया है तेरी |
ये फलक कैसे जुडें - मुझको मालूम नहीं ||१||

तू कहीं और का है, मैं कहीं और का हूँ |
हम कहीं और मिलें - कोई साजिश तो नहीं ||२||


तू किसी और भरम, मैं किसी और भरम |
एक ही होश मगर - और जादू भी नहीं ||३||

एक किरदार मेरा, एक किरदार तेरा |

एक अफसाना भी है - फलसफा कोई नहीं ||४||

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