जो तू बेवफा होता तो हम कुछ बददुआ देते,
तू सिर है वफ़ा का,
कुछ कहते नहीं बनता|(१)
जो ये इश्क ना होता तो हम यूँ ही जी लेते,
ये है हर तरफ मेरे,
कहीं जाते नहीं बनता|(२)
मेरी साँसे, मेरी धड़कन, मेरा दिल मेरा नहीं है,
कशी कब की हुई होती,
पर ये मरना नहीं बनता|(३)
भरी बरसात है, दरिया है, समंदर भी यहीं है,
तरास कोई नहीं है,
मेरा पीना नहीं बनता|(४)
तू सिर है वफ़ा का,
कुछ कहते नहीं बनता|(१)
जो ये इश्क ना होता तो हम यूँ ही जी लेते,
ये है हर तरफ मेरे,
कहीं जाते नहीं बनता|(२)
मेरी साँसे, मेरी धड़कन, मेरा दिल मेरा नहीं है,
कशी कब की हुई होती,
पर ये मरना नहीं बनता|(३)
भरी बरसात है, दरिया है, समंदर भी यहीं है,
तरास कोई नहीं है,
मेरा पीना नहीं बनता|(४)

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