Friday, November 4, 2011

ख़ाब ..... خاب

ये मेरा बुरा साल गुज़र जाए तो अच्छा |
मझधार में डूबा है जो, तर जाए तो अच्छा ||१||

कितने दरार सहता है, दीवार है - पत्थर |
ये आज टूट के जो बिखर जाए तो अच्छा ||२||

दीवानगी ने आपकी दीवाना कर दिया |
दीवानेपन से दिल मेरा भर जाए तो अच्छा ||३||

माने न माने होने को, तेरे कि या मेरे |
हर शख्स की पहचान मुकर जाए तो अच्छा ||४||

रूठा हुआ है एक मेरा यार जो मुझसे |
दुनिया भी सारी मुझसे बिगड़ जाए तो अच्छा ||५||

हूँ हिज्र में कि या कि किसी जंग में हूँ मैं ?
मजहब भी मेरा, खुदा से डर जाए तो अच्छा ||६||

कातिल के दर से सलामत होने में हैं लानत |
काँधे से मेरे आज ये सर जाए तो अच्छा ||७||

जीना नहीं होता मेरा तेरे बिना ज़ालिम |
इस दर्द से 'कोई नहीं' मर जाए तो अच्छा ||८||

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