ये मेरा बुरा साल गुज़र जाए तो अच्छा |
मझधार में डूबा है जो, तर जाए तो अच्छा ||१||
कितने दरार सहता है, दीवार है - पत्थर |
ये आज टूट के जो बिखर जाए तो अच्छा ||२||
दीवानगी ने आपकी दीवाना कर दिया |
दीवानेपन से दिल मेरा भर जाए तो अच्छा ||३||
माने न माने होने को, तेरे कि या मेरे |
हर शख्स की पहचान मुकर जाए तो अच्छा ||४||
रूठा हुआ है एक मेरा यार जो मुझसे |
दुनिया भी सारी मुझसे बिगड़ जाए तो अच्छा ||५||
हूँ हिज्र में कि या कि किसी जंग में हूँ मैं ?
मजहब भी मेरा, खुदा से डर जाए तो अच्छा ||६||
कातिल के दर से सलामत होने में हैं लानत |
काँधे से मेरे आज ये सर जाए तो अच्छा ||७||
जीना नहीं होता मेरा तेरे बिना ज़ालिम |
इस दर्द से 'कोई नहीं' मर जाए तो अच्छा ||८||
मझधार में डूबा है जो, तर जाए तो अच्छा ||१||
कितने दरार सहता है, दीवार है - पत्थर |
ये आज टूट के जो बिखर जाए तो अच्छा ||२||
दीवानगी ने आपकी दीवाना कर दिया |
दीवानेपन से दिल मेरा भर जाए तो अच्छा ||३||
माने न माने होने को, तेरे कि या मेरे |
हर शख्स की पहचान मुकर जाए तो अच्छा ||४||
रूठा हुआ है एक मेरा यार जो मुझसे |
दुनिया भी सारी मुझसे बिगड़ जाए तो अच्छा ||५||
हूँ हिज्र में कि या कि किसी जंग में हूँ मैं ?
मजहब भी मेरा, खुदा से डर जाए तो अच्छा ||६||
कातिल के दर से सलामत होने में हैं लानत |
काँधे से मेरे आज ये सर जाए तो अच्छा ||७||
जीना नहीं होता मेरा तेरे बिना ज़ालिम |
इस दर्द से 'कोई नहीं' मर जाए तो अच्छा ||८||
बेहतरीन प्रस्तुति।
ReplyDeleteबहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति।
ReplyDeletedhanywaad
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